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क्रांतिदूत शृंखला
लेखक: डॉ मनीष श्रीवास्तवभाषा: हिन्दी
“मित्रमेला” क्रांतिदूत उपन्यास-शृंखला की तीसरी पुस्तक है। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के उन जाने-पहचाने और अनजाने क्रांतिकारियों की कहानी कहती है, जिन्हें इतिहास में वह स्थान नहीं मिल पाया, जिसके वे अधिकारी थे।विनायक सावरकर और स्वतन्त्रता संग्राम में महाराष्ट्र के क्रांतिवीरों और क्रांतिदूतों की जागृति को यह पुस्तक विशेष रूप से विस्तार देती है।
इस पुस्तक की विशेषताएँ:
• इतिहास और उपन्यास का मेल - ऐतिहासिक घटनाओं और पात्रों को सरल और रोचक कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
• अनजाने क्रांतिकारियों की कहानी - ऐसे वीरों और उनके संघर्षों से परिचय कराती है, जिनका उल्लेख इतिहास में कम मिलता है।
• महाराष्ट्र और कुछ विदेश के स्थानों का ऐतिहासिक संदर्भ - पुणे, नासिक और महाराष्ट्र के क्षेत्र में, बंगाल के विभाजन के फलस्वरूप स्वतंत्रता के लिए हुए संघर्ष और उसमें योगदान देने वाले लोगों को सामने लाती है।
• देश के लिए त्याग और बलिदान - इन वीरों के साहस, त्याग और देश के प्रति समर्पण की कहानियों के माध्यम से प्रेरणा देती है।
लेखक की दस-खंडीय “क्रांतिदूत” उपन्यास-शृंखला भारत के उन क्रांतिकारियों के जीवन, संघर्ष और देश के प्रति उनके समर्पण को सामने लाने का प्रयास है, जिनकी कहानियाँ इतिहास के मुख्य पन्नों में कहीं पीछे छूट गईं। मित्रमेला इसी यात्रा की तीसरी पुस्तक है और पाठकों को स्वतंत्रता संग्राम के उन पात्रों और घटनाओं से परिचित कराती है, जिन्हें जानना और याद रखना आवश्यक है।
यह पुस्तक इतिहास के उन भूले-बिसरे पन्नों को फिर से सामने लाने का एक प्रयास है, जिनमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम की अनेक अनकही कहानियाँ आज भी जीवित हैं।