झाँसी फाइल्स

क्रांतिदूत शृंखला

$9.32

लेखक : डॉ मनीष श्रीवास्तवभाषा: Hindi

“झाँसी फाइल्स” क्रांतिदूत उपन्यास-शृंखला की पहली पुस्तक है। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के उन जाने-पहचाने और अनजाने क्रांतिकारियों की कहानी कहती है, जिन्हें इतिहास में वह स्थान नहीं मिल पाया, जिसके वे अधिकारी थे। झाँसी और उसके आसपास के क्षेत्र में हुए संघर्षों, साहस और बलिदान की घटनाओं के माध्यम से यह पुस्तक उस समय की देशभक्ति और स्वतंत्रता की भावना को सामने लाती है।

इस पुस्तक की विशेषताएँ:

इतिहास और उपन्यास का मेल - ऐतिहासिक घटनाओं और पात्रों को सरल और रोचक कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

अनजाने क्रांतिकारियों की कहानी - ऐसे वीरों और उनके संघर्षों से परिचय कराती है, जिनका उल्लेख इतिहास में कम मिलता है।

झाँसी का ऐतिहासिक संदर्भ - झाँसी और उसके आसपास के क्षेत्र में स्वतंत्रता के लिए हुए संघर्ष और उसमें योगदान देने वाले लोगों को सामने लाती है।

देश के लिए त्याग और बलिदान - इन वीरों के साहस, त्याग और देश के प्रति समर्पण की कहानियों के माध्यम से प्रेरणा देती है।

लेखक की दस-खंडीय “क्रांतिदूत” उपन्यास-शृंखला भारत के उन क्रांतिकारियों के जीवन, संघर्ष और देश के प्रति उनके समर्पण को सामने लाने का प्रयास है, जिनकी कहानियाँ इतिहास के मुख्य पन्नों में कहीं पीछे छूट गईं। झाँसी फाइल्स  इसी यात्रा की पहली पुस्तक है और पाठकों को स्वतंत्रता संग्राम के उन पात्रों और घटनाओं से परिचित कराती है, जिन्हें जानना और याद रखना आवश्यक है।

यह पुस्तक इतिहास के उन भूले-बिसरे पन्नों को फिर से सामने लाने का एक प्रयास है, जिनमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम की अनेक अनकही कहानियाँ आज भी जीवित हैं।

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लेखक परिचय 

जन्म: 20 मार्च, 1969, (झाँसी)
पिता: श्री राजेन्द्र प्रताप श्रीवास्तव, माता: श्रीमती शांति देवी श्रीवास्तव
धर्मपत्नी: पुष्पलता श्रीवास्तव, पुत्री: नीलाक्षी श्रीवास्तव
शिक्षा: बी.एससी., एल.एल.बी., साहित्यरत्न, विद्यावाचस्पति
प्रकाशित उपन्यास: रूही - एक पहेली (2017), मैं मुन्ना हूँ (2020), क्रांतिदूत भाग-1 - झाँसी फाइल्स, क्रांतिदूत भाग-2 - काशी, क्रांतिदूत भाग-3 - मित्रमेला, क्रांतिदूत भाग-4 - ग़दर, क्रांतिदूत भाग-5 - बसंती चोला, क्रांतिदूत भाग-6 - घर वापसी, क्रांतिदूत भाग-7- यारियाँ, क्रांतिदूत भाग-8- संघर्ष, क्रांतिदूत भाग-9- विद्रोह, क्रांतिदूत भाग-10- विसर्जन
सम्मान: बुंदेलखंड रत्न 2021, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला साहित्य सम्मान 2022, विक्रमशिला विश्वविद्यालय द्वारा विद्यावाचस्पति की मानद उपाधि।

डाॅ. मनीष श्रीवास्तव समकालीन हिंदी साहित्य के ऐसे रचनाकार हैं, जिनकी लेखनी मानवीय संवेदनाओं, भावनात्मक अनुभवों और ऐतिहासिक चेतना का सशक्त समन्वय प्रस्तुत करती है। वे मुख्यतः भावप्रधान कहानियाँ, मार्मिक संस्मरण तथा ऐतिहासिक कथात्मक साहित्य का सृजन करते हैं। उनकी भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और आम बोलचाल की है, जिसमें बुंदेलखंड की आंचलिक शब्दावली का स्वाभाविक और जीवंत स्पर्श मिलता है।
उनकी महत्त्वाकांक्षी दस-खंडीय 'क्रांतिदूत' उपन्यास-शृंखला भारत के उन ज्ञात-अज्ञात, सुने-अनसुने क्रांतिनायकों के जीवन, संघर्ष और राष्ट्रसमर्पण को साहित्यिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिन्हें इतिहास के मुख्य प्रवाह में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया। इस शृंखला का उद्देश्य पाठकों को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन विलक्षण पात्रों और उनके युग से परिचित कराना है, जिनके त्याग और बलिदान ने राष्ट्र के स्वाधीनता-संग्राम को नई दिशा प्रदान की।
डाॅ. मनीष श्रीवास्तव हिमालय ड्रग कम्पनी में 30 से अधिक सालों तक देश-विदेश में कार्यरत रहने के पश्चात अब सेवानिवृत जीवनयापन करते हुए पूर्णकालिक लेखक और विचारक हैं। इंडिक टुडे के हिंदी अनुभाग के लिए परामर्श संपादक के रूप में भी डाॅ. मनीष श्रीवास्तव अपनी सेवाएँ देते हैं। स्वराज्य, ऑफ इंडिया, मंडली आदि मीडिया मंचों पर समसामयिक विषयों, साहित्य, संस्कृति, इतिहास, संगीत तथा वाद्ययंत्रों पर लिखना पसंद करते हैं। हाल ही में उन्हें साहित्य, सांस्कृतिक, कला संगम अकादमी परियावाँ, प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) द्वारा विद्यावाचस्पति सम पीएच.डी. की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है।